योजना और सब्सिडीउत्तर प्रदेश कृषि विभाग
जानियें किसानों के लिए पुनर्गठन परियोजना के लाभ!
"सिंचाई जल के सदुपयोग को हम जल तथा मृदा का उचित प्रबन्धन कराकर प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए विभिन्न पद्धतियों जैसे कि नहर जल प्रबन्धन, खेत पर जल प्रबन्धन, सिंचाई की उचित समय सारिणी बनाकर, जल वितरण प्रणाली की क्षमता में सुधार कर, भूमि का समतलीकरण कराकर, उन्नति सिंचाई ढंग, सूक्ष्म सिंचाई विधियां, मेंडबन्दी, गहरी जुताई, मल्चिंग, कम जल मांग वाली प्रजातियों का प्रयोग, उन्नतिशील कर्षण क्रियाएं, सतही जल एवं भूजल का संतुलित प्रयोग, वर्षा जल संरक्षण कराकर, फसल विविधीकरण आदि अपनाकर कर सकते हैं। कम्पोस्ट का प्रयोग, हरी खाद का प्रयोग संतुलित उर्वरकों को अपनाकर संसाधनों का अधिकतम प्रयोग कर सकते हैं तथा उपलब्ध संसाधनों से अपेक्षित उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।परियोजना क्षेत्रउल्लेखनीय है कि इस महत्वपूर्ण परियोजना के द्वितीय चरण की अवधि 24 अक्टूबर, 2013 से 31 अक्टूबर, 2020 तक है, किन्तु अपरिहार्य कारणों से कृषि विभाग द्वारा घटक-डी (कृषि) के कार्यक्रम वर्ष 2015-16 के रबी फसल से प्रारम्भ हो सके। इस योजना के समस्त घटकों एवं लक्ष्यों की पूर्ति हेतु वर्ष 2016-17 से अक्टूबर 2020 तक की अवधि को पुनर्नियोजित किया गया है।योजनान्तर्गत प्रदेश के 19 जनपदों में तीन कैनाल इरीगेंशन सिस्टमशारदा सहायक (अमेठी, बाराबंकी, जौनपुर, प्रतापगढ़, सुलतानपुर, रायबरेली)लोअर गंगा (कासगंज, एटा, मैनपुरी, फिरोजाबाद, इटावा, फतेहपुर, कन्नौज, औरेया, कौशाम्बी, फर्रुखाबाद, कानपुर नगर, कानपुर देहात एवंरोहिणी, जामिनी एवं सजनम डैम (ललितपुर) में परियोजना कार्य सम्पादित किये जा रहे हैं। परियोजना का उद्देश्यकैनाल कमाण्ड ऐरिया में धान तथा गेहॅू की उत्पादकता में फसल नियोजन तथा संयुक्त जल उपयोग से संरक्षित वृद्धि करना।समुचित जल उपयोग से दलहनी तथा तिलहनी फसलों के क्षेत्रफल में वृद्धि तथा उत्पादकता में वृद्धि करना विशेषकर जायद की फसलों में।जल उपयोग क्षमता तथा मृदा उर्वरता में वृद्धिः- वर्तमान में सतही जल उपयोग क्षमता 35 से 40 प्रतिशत है तथा भूजल की उपयोग क्षमता 60 प्रतिशत है जिसे दक्षतापूर्वक जल प्रबंधन अपना कर 70 से 80 प्रतिशत तक बढाया जा सकता है जैसे कि भूमि का समतलीकरण, सिंचाई समय सारणी, कनवेयन्स क्षमता में सुधार, उन्नतिशील सिंचाई तकनीक, पलवार, कम पानी आवश्यकता वाली प्रजातियों का चयन, पानी की उपलब्धता तथा मृदा के प्रकार के आधार पर फसलों का चयन, समय से बुआई, तथा भूजल तथा सतही जल का सहयुक्त प्रयोग, उचित फसल चक्र अपनाने हेतु व्यापक प्रचार-प्रसार करना इत्यादि।कृषि तकनीक के प्रचार-प्रसार तन्त्र को परियोजना क्षेत्र तथा क्षेत्र के बाहर सुदृढ करना।जल उपभोक्ता समितियों में संस्थागत प्रक्रिया को विकसित करना, जिससे कैनाल कमाण्ड एरिया में सिंचाई के संसाधनों का दक्षतापूर्वक संचालन किया जा सके तथा अधिक से अधिक किसानों को समय पर उनकी मांग के अनुरूप सिंचाई जल उपलब्ध हो सके।"
स्रोत - उत्तर प्रदेश कृषि विभाग प्रिय किसान भाइयों यदि दी गयी योजना की जानकारी उपयोगी लगे तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करना ना भूलें धन्यवाद। 
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