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दलहनी फसलों में बिहार रोयेंदार सूँड़ी का नियंत्रण!
यह दलहनी फसलों का पत्ती खाने वाले कीटों में प्रमुख कीट है। यह कीट पौधों की पत्तियाँ, फूल और फलियों को खाकर नुकसान पहुँचाते है। इस कीट की मादा पतंगा पत्तियों की निचली सतह पर एक साथ 400-500 अण्डे एक ही स्थान पर देती है। इनसे छोटी सूड़ियाँ निकल कर झुण्ड में एक साथ पत्तियों का पूरा हरा पदार्थ खा जाती हैं। ऐसी पत्तियाँ दूर से ही धूसर सफेद झिल्ली जैसी दिखायी देती हैं जिसमें बहुत सी शिशु सूड़ियाँ चिपकी होती हैं जो बड़ी होकर पूरे खेत में फैल जाती है और फसल को काफी हानि पहुँचाती हैं। व्यस्क सूडियाँ पत्तियों व कोमल तना व टहनियों को खाती हैं जिससे कुछ दिनों में पौधे की लगभग सारी पत्तियाँ खत्म हो जाती है व फसल पूर्णतया क्षतिग्रत हो जाती है। इस कीट का प्रकोप अनियमित है। अनुकूल वातावरण की स्थिति में ही इसका प्रकोप अधिक होता है। यह एक बहुभक्षी कीट है जो मूंग की फसलों के अलावा उड़द, अरहर, बरसीम, सरसों व सूरजमुखी की फसलों में क्षति पहुँचाता है। प्रबंधन:- यह कीट प्रायः झुंड में पौधों पर मिलता है। ऐसे पौधों को उखाडकर कर नष्ट कर दें। यह इस कीट के रोकथाम का सरल व प्रभावी उपाय है। बुवेरिया बैसियाना (5 मि.ली. प्रति लीटर पानी) में मिलाकर छिडकाव, इस कीट के छोटी सूड़ियों का प्रभावी जैविक प्रबंधन विकल्प है। क्वीनालफोस 25 ई.सी. (2.0 मि.ली. प्रति लीटर पानी) अथवा फेनवलेरेट 20 ई.सी. (1.0 मि.ली. प्रति लीटर) से छिडकाव प्रभावी होता है। इमोमेक्टिन बेन्जोएट 5 एस जी का 0.5 ग्राम प्रति लीटर अथवा इन्डाक्साकार्व 14.5 एस सी का 0.8 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से छिडकाव या फेनवलेरेट 0.4 प्रतिशत का 20 के. जी. प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव भी लाभकारी रहता है।
स्रोत:- IIPR, प्रिय किसान भाइयों यदि आपको दी गयी जानकारी उपयोगी लगी तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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