कृषि वार्ताकिसान समाधान
कृषि वैज्ञानिकों ने जारी की चेतावनी: अभी सोयाबीन की फसल में लग सकते हैं यह कीट एवं रोग!
फसल के अच्छे उत्पादन के लिए फसलों को कीट एवं रोगों का समय पर नियंत्रण करना बहुत जरुरी होता है अन्यथा फसल को काफी नुकसान पहुंचता है जिससे उत्पादन में भी कमी होती है। अभी देश में मानसून का सीजन चल रहा है जिसके चलते लगातार बारिश, जल भराव आदि स्थतियों के कारण बहुत से कीट रोगों के लगने की सम्भावना होती है। सोयाबीन की फसल में भी इस समय कीट रोगों का प्रकोप देखा जा सकता है। मध्यप्रदेश राज्य के बहुत से क्षेत्रों में कई स्थानों से सोयाबीन की फसल में ‘यलो मोजेक’ रोग लगने की सूचना आई है। जिससे फसलों को काफी नुकसान हो रहा है। कृषि विभाग ने इस संबंध में तुरंत कार्रवाई करते हुए फसलों की इससे सुरक्षा के हरसंभव उपाय करें, जिससे किसानों की फसलों को नुकसान न हो। कृषि वैज्ञानिकों को द्वारा सोयाबीन की फसल में लगने वाले कीट-रोगों को लेकर किसानों के लिए सलाह जारी की गई है जिससे किसान अपनी फसल पर लगने वाले कीट-रोगों पर नियंत्रण प्राप्त कर सकते हैं। सोयाबीन में पीला मोजेक रोग का नियंत्रण कृषकों को सलाह दी गई है कि पीला मोजेक पर नियंत्रण के लिये प्रारंभिक अवस्था में ही अपने खेत में जगह-जगह पर पीला चिपचिपा ट्रैप लगाएं जिससे इसका संक्रमण फैलाने वाली सफेद मक्खी का नियंत्रण होने में सहायता मिले। इसके रोकथाम के लिए फसल पर पीला मोजेक रोग के लक्षण देखते ही ग्रसित पौधों को अपने खेत से निष्कासित करें। ऐसे खेत में सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए अनुशंसित पूर्व मिश्रित सम्पर्क रसायन जैसे बीटासायफ्लुथ्रिन + इमिडाइक्लोप्रिड (350 मिली/हेक्टेयर) या पूर्व मिश्रित थायोमिथाक्सम + लैम्बडा सायहेलोथ्रिन (125 मिली/हेक्टेयर) का छिड़काव करें जिससे सफेद मक्खी के साथ-साथ पत्ती खाने वाले कीटों का भी एक साथ नियंत्रण हो सकें। सोयाबीन में पत्ती खाने वाली इल्लियों का नियंत्रण कुछ क्षेत्रों में लगातार हो रही रिमझिम वर्षा की स्थिति में पत्ती खाने वाली इल्लियों द्वारा पत्तियों के साथ-साथ फलियों को भी नुकसान पहुँचा रही है जिससे अफलन जैसी समस्या होने की संभावना है। पत्तियाँ खाने वाली इल्लियों के नियंत्रण के लिये संपर्क कीटनाशक जैसे इन्डोक्साकार्ब 333 मिली/हेक्टेयर या लैम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.9 सीएस 300 मिली/हेक्टेयर का छिड़काव करें। कीटनाशक को प्रभावी ढंग से इल्लियों तक पहुँचाने के लिए नैपसेक स्प्रेयर से 500 लीटर या पॉवर स्प्रेयर से 120 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर का उपयोग अवश्य करें। यदि पत्ती खाने वाली इल्लियों के साथ-साथ सफेद मक्खी का प्रकोप हो, कृषकों को सलाह हे कि नियंत्रण के लिये बीटासायफ्लुथ्रिन+ इमिडाक्लोप्रिड 350 मिली/हेक्टेयर, या थायमिथोक्सम + लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 मिली/हेक्टेयर का छिड़काव करें। सोयाबीन में फफूंदजनित एन्थ्रेकनोज तथा राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट रोग कुछ क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल में फफूंदजनित एन्थ्रेकनोज तथा राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाईट नामक बीमारी का प्रकोप होने की सूचना प्राप्त हुई है। अत: इनके नियंत्रण के लिये सलाह है कि टेबूकोनाझोल (625 मिली/हेक्टैयर) अथवा टेबूकोनाझोल + सल्फर (1 किग्रा/हेक्टेयर) अथवा पायरोक्लोर्स्टोबीन 20 डब्ल्यूजी (500 ग्राम/हेक्टैयर) अथवा हेक्जाकोनाझोल 5 प्रतिशत ईसी (800 मिली/हेक्टेयर) से छिड़काव करें। सोयाबीन की फसल में नुकसान करने वाले अन्य कीटों से बचाव के लिये कृषकों को सलाह है कि अपने खेते में फसल निरीक्षण के उपरांत पाए गए कीट विशेष के नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशक की मात्रा को 500 लीटर/हेक्टेयर, की दर से पानी के साथ फसल पर छिड़काव करें। छिड़काव के लिये पावर स्प्रेयर का उपयोग किये जाने पर 120 लीटर/हेक्टेयर पानी की आवश्यकता होगी एवं छिड़काव भी प्रभावकारी होगा। स्रोत:- किसान समाधान, 22 अगस्त 2020, प्रिय किसान भाइयों यदि आपको दी गयी जानकारी उपयोगी लगी तो इसे लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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