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अरंडी की फसल में उकठा रोग का नियंत्रण!
अरंडी की फसल में यह उकता रोग सभी फसल विकास अवस्थाओं में पूरे वर्ष होता है। इस रोग के लक्षण छोटे एवं बड़े सभी पौधों में दिखाई देते हैं, जिससे पौधों में पत्तियां पीली पढ़कर झड़ने लगती हैं परिणामस्वरूप पौधे कमजोर होकर सुख जाते हैं। फूलों की पूर्व अवस्था में लक्षण धीरे-धीरे पीला पड़ना, पत्तों की सीमांत और आंतों के परिगलन के रूप में प्रकट होते हैं, अपरिवर्तनीय विल्टिंग के विकास में निचले पत्तों की कोमलता, शीर्ष पत्तियों और शाखाओं का झुकना आदि लक्षण दिखाई पड़ते हैं। ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई करें। बीज की बुवाई पूर्व थायरम 75 डब्ल्यूपी 3 ग्राम/किग्रा बीज या कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम/किग्रा बीज या ट्राइकोडर्मा एस्परेलम/ट्राइकोडर्मा हर्ज़ियानम @ 10 ग्राम प्रति किग्रा बीज के साथ बीजोपचार कर बीज जनित एवं मृदा जनित रोगों से बचाया जा सकता है। सहिष्णु किस्मों और संकर किस्मों की खेती करें। ज्योति, DCS-107, DCH-519, DCH-177, GCH-७ ट्राइकोडर्मा विरिडी/ट्राइकोडर्मा हर्ज़ियानम @ 2.5 किलोग्राम को 125 किलोग्राम गोबर की खाद के साथ मिलाकर जमीन के माध्यम से दें।
स्रोत:- IIOR, किसान भाइयों यदि आपको दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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