सलाहकार लेखकृषक जगत
मूंगफली की फसल में टिक्का रोग का नियंत्रण!
मूंगफली का यह एक मुख्य रोग है और मूंगफली की खेती करने वाले सभी क्षेत्रों में देखा जाता है। इस रोग में पत्तियों के ऊपर बहुत अधिक धब्बे बनने के कारण वह शीघ्र ही पकने के पूर्व गिर जाती है, जिससे पौधों से फलियां बहुत कम और छोटी प्राप्त होती हैं। इस रोग से लगभग 10-50 प्रतिशत तक उत्पादन कम हो जाता है। यह मूंगफली का सबसे भयानक रोग है तथा यह रोग फफूंदी के द्वारा फैलता है। इस रोग का मुख्य लक्ष्ण सबसे पहले पत्तियों पर लगता है और यह रोग 3-6 सप्ताह की पुरानी पत्तियों में इस रोग का प्रकोप होने पर छोटे-छोटे गहरे कत्थई रंग के गोल-गोल धब्बे उत्पन्न हो जाते हैं। और कुछ पत्तियां पीली भी पढ़ जाती हैं जब रोग का प्रकोप बढ़ जाता है फिर पत्तियाँ धीरे-धीरे गिरने लगती हैं तथा इस रोग के लगने पर मूंगफली का उत्पादन काफी कम हो जाता है। रोकथाम मूंगफली के पुराने संक्रमित अवशेषों को खेत से कुछ कोस दूर गड्ढे की खुदाई करे और मिट्टी में दबा दें। उर्वरक एनपीके और जिप्सम का प्रयोग करें, इसके उपयोग से रोग कम लगता है। इमिडाक्लोप्रिड 18.5% + हेक्साकोनाज़ोल 1.5% FS @ 3-5 ग्राम / किलोग्राम बीज के साथ बीजोपचार करें। सल्फर 80% WP @ 1 किग्रा/एकड़ दें। कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% डब्ल्यूबी@ 200 ग्राम/एकड़ 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें।
स्रोत:- कृषक जगत, किसान भाइयों यदि आपको दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद।
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