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मिर्च की फसल में जड़ गांठ सूत्रकृमि का नियंत्रण!
यह सूत्रकृमि प्राथमिक तथा द्वितीयक जड़ों को प्रभावित करके फसल को नुकसान पहुँचता है। इसकी एक निश्चित संख्या से अधिक उपस्थिति पौधों में पानी तथा अन्य पोषक तत्वों को प्राप्त करने में अवरोध उत्पन्न करती है। जिससे गुणवत्ता पर विपरीत प्रभाव के साथ उत्पादन भी कम हो जाता हैं। मृदा में पोषक तत्व एवं पानी की उपलब्धता होते हुए भी जडों द्वारा पौधे इन्हें पर्याप्त मात्रा में ग्रहण नहीं कर पाते हैं। जडें फूली हुई प्रतीत होती हैं तथा पौधे कमजोर ,बौने ,पीले हो जाते हैं। इस रोग से ग्रसित पौधों में उकठा/फँफूदी रोग शीघ्र लग जाता हैं। इसके नियंत्रण के लिए गर्मियों में गहरी जुताई करें एकल फसल प्रणाली नहीं अपनानी चाहिए पूसा ज्वाला, NP- 46 A, मोहिनी प्रतिरोधी किस्मों का प्रयोग करें
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