सलाहकार लेखकृषक जगत
मूंगफली की फसल में सफ़ेद लट कीट प्रबंधन
खरीफ की अधिकांशत: मूंगफली, की फसल में नुकसान पहुंचाता है। इस कीट की प्रौढ अवस्था व लट अवस्था दोनों की नुकसान पहुंचाती है। फसलों में सामान्यतः लट (ग्रब) एवं पेड़-पौधों में प्रौढ़ कीट (बीटल) द्वारा नुकसान होता है। इसकी रोकथाम :- प्रौढ कीट का नियंत्रण – इस कीट के भृंग मानसून की प्रथम वर्षा पर पश्चात सूर्यास्त के पश्चात प्रतिदिन भूमि से बाहर निकलते हैं तथा आसपास के पौषी वृक्षों जैसे बेर, खेजड़ी, नीम, गुलर, सेंजना आदि पर बैठते है तथा इनकी पत्तियां खाते है। सफेद लट से फसलों को बचाने के लिये भृंग नियंत्रण सबसे उत्तम उपाय है। इसके लिए चुने गये वृक्षों पर कीटनाशी दवाओं का छिड़काव किया जाता है। 15 मी. अद्र्धव्यास क्षेत्र में केवल एक ही परपोशी वृक्ष का चयन कर उसी पर कीटनाशी इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 1.5 मि.ली. प्रति ली. अथवा क्विनालफॉस 25 ई.सी. 2 मि.ली. प्रति ली. या कार्बोरिल 50 ड्ब्ल्यू पी 4 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त चयनित वृक्ष पर 3 से 4 फेरोमोन स्पन्ज प्रति दिन शाम को भृंग निकलने के समय ही तैयार कर वृक्षों पर लटकाये। फेरोमोन विधि द्वारा भृंग नियंत्रण सबसे सस्ता एवं कम प्रदूषण फैलाने वाला उपचार है। लट अवस्था में नियंत्रण – बुवाई या रोपाई से पूर्व दानेदार दवा द्वारा भूमि उपचार किया जाना चाहिये। इसके लिये क्विनालफॉस 5 प्रतिशत या कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत में से कोई एक दवा को बुवाई से पूर्व हल द्वारा कतारों में ऊर कर दें। तथा इन्हीं कतारों परबुवाई करें।
स्रोत:- कृषक जगत, दी गई जानकारी को लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें !
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