सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
गोभी की फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन!
गोभी की फसल से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए फसल से कीटों का प्रबंधन होना चाहिए इसके लिए निम्न उपाए अपनाएं - रोगों के फैलाव को कम करने के लिए पंक्ति से पंक्ति व पौधे से पौधे की दूरी 60x45 सेंमी रखें। हीरक पृष्ठ शलभ तथा चेंपा के लिए गोभी की प्रत्येक 25 कतारों के बाद जाल फसल के रूप में सरसों की एक कतार उगायें। हीरक पृष्ठ शलभ के लिए रोपाई के 10 दिन बाए 3 ग्रा प्रति ली. की दर से बैसिलस थुरिनेंसिस का छिड़काव करें तथा 3 प्रकाश जाल लगायें। कीट के वयस्क प्रकाश की ओर आकर्षित होते हैं और पानी से भरी बाल्टी में गिर जाते हैं। 3-4 दिनों में अधिकांश कीट मर जाते हैं। हीरक पृष्ठ शलभ की निगरानी के लिए 2 फेरोमोन जाल प्रति एकड़ की दर से लगायें। प्रत्येक 20 - 25 दिन के अंतराल पर ल्यूर को बदलें। एक सप्ताह के अन्तराल पर 1.0 लाख प्रति हे. की दर से 3 - 4 बार अंडा परजीवी ट्राइकोग्रामा फसल में छोड़ें। आल्टोर्नेरिया पत्ती धब्बे के लिए मेंकोजेब 75 डब्ल्यू पी अथवा जिनेब 75 डब्ल्यू पी का 1.5 - 2.0 किग्रा प्रति हे. की दर से 750 - 1000 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। संक्रमित पत्तियों को पौधों से तोड़कर हटा देना प्रभावी होता है। ताना बेधक के लिए कार्बेरिल 50 डब्ल्यू पी का 1000 ग्राम अथवा मैलाथियान 50 ईसी का 1500 मिली प्रति हे. की दर से 1000 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। हीरक पृष्ठ शलभ के नियंत्रण के लिए आवश्यकता के अनुसार साइपरमेथ्रिन 10 ईसी का 650 मिली प्रति हे. या स्पिनोसैड 2.5 एससी का 10 ग्रा प्रति हे. या ईमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी का 150 ग्रा प्रति हे. अथवा क्लोरएट्रानीलीप्रोल 18.5 एससी 50 मिली प्रति हे. की दर से 500 लिटर पानी के साथ छिड़काव करें। फूलगोभी की पछेती फसल में चेपा के नियंत्रण के लिए 75 ग्रा प्रति हे. की दर से एसिटामाईप्रीड 20 ईसी या डायमीथायोएट 30 ईसी का 650 मिली प्रति हे. की दर से 500 - 1000 लिटर पानी के साथ छिड़काव करें। माहु को फसाने के लिए पीले चिपचिपे ट्रैप लगायें। तम्बाकू की इल्ली के अंड समूहों तथा लार्वों को एकत्रित करें क्योंकि ये झूंड में रहने वाले प्रकृति के होते हैं। तम्बाकू की इल्ली के नियंत्रण के लिए साईंएन्ट्रानीलीप्रोल 10.26 ओडी 600 ग्रा प्रति हे. या ट्राईक्लोरफोन 50 ईसी 750 ग्रा प्रति हे. की दर से आवश्यकतानुसार छिड़काव करें।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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