सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
बाजरा में नाइट्रोजन का महत्व एवं आवश्यकता!
बाजरा की फसल में नाइट्रोजन की आवश्यकता पौध विकास एवं कल्लों की संख्या में वृद्धि उचित उत्पादन के लिए की जाती है। नाइट्रोजन के प्रमुख कार्य:- नाइट्रोजन से प्रोटीन बनती है जो जीव द्रव्य का अभिन्न अंग है तथा पर्ण हरित के निर्माण में भी भाग लेती है। नाइट्रोजन का पौधों की वृद्धि एवं विकास में योगदान इस तरह से है। यह पौधों को गहरा हरा रंग प्रदान करता है। वानस्पतिक वृद्धि को बढ़ावा मिलता है। अनाज तथा चारे वाली फसलों में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाता है। यह दानो के बनने में मदद करता है। नाइट्रोजन -कमी के लक्षण:- पौधों मे प्रोटीन की कमी होना व हल्के रंग का दिखाई पड़ना। निचली पत्तियाँ झड़ने लगती है, जिसे क्लोरोसिस कहते हैं। पौधे की बढ़वार का रूकना, कल्ले कम बनना, फूलों का कम आना। फसल का गिरना। पौधों का बौना दिखाई पड़ना। फसल का जल्दी पक जाना। बाजरा में नाइट्रोजन देने की विधि:- बाजरा की फसल में नाइट्रोजन दो बार दिया जाता है। प्रथम बुवाई के पहले खेत में पाटा लगाने के पूर्व। और दूसरा बुवाई के 25 से 30 बाद उचित नमी की मात्रा होने पर। नाइट्रोजन को छिटकाव विधि द्वारा ही दोनों बार दिया जाता है।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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