सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
धान की अधिक उपज प्राप्त करने के लिए प्रमुख बिन्दु!
जलवायु परिवर्तन को दृष्टिगत रखते हुए सुनिश्चित सिंचाई वाले क्षेत्रों में धान की जल्दी पकने वाली संकर किस्मों (110-115 दिन में पकने वाली)की बुआई एसआरआई पद्धति से करें। गहरी काली मिट्टी में वर्षा पूर्व धान की सीधी बुआई कतार में करें। शीघ्र पकने वाली किस्में, जे.आर.एच.-5, 8, पी.एस.-6129, दंतेश्वरी, सहभागी, मध्यम समय में पकने वाली किस्में- डब्लू.जी.एल.-32100, पूसा सुगंधा-3, पूसा सुगंधा-5, एम.टी.यू-1010, जे आर 353 । क्रांति एवं महामाया किस्मों को प्रोत्साहित न किया जावे। बासमती किस्मों से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए पूसा बासमती-1121, पूसा बासमती-1509 एवं पूसा बासमती-1460 किस्मों को अधिक क्षेत्र में लगावें। बुवाई कतारों में करें। अतिशीघ्र एवं शीघ्र पकने वाली किस्में को 15*15 से.मी. मध्यम समय में पकने वाली किस्मों को 20*15 से.मी. तथा देर से पकने वाली किस्मों को 25*20 से.मी. की दूरी पर लगायें। बुआई अथवा रोपाई के 20 दिन बाद नील हरित शैवाल 15 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर का प्रयोग करें। खाद एवं उर्वरक की संतुलित मात्रा का प्रयोग करें। खरपतवार समय समय पर नियंत्रित करें। उचित पानी की व्यवस्था बनायें रखें। रोगों एवं कीटों की समय समय पर निगरानी कर नियंत्रण करें।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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