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सोयाबीन की फसल में तना छेदक कीट का नियंत्रण!
सोयाबीन की फसल में तना छेदक कीट प्रारंभिक अवस्था में इससे प्रकोपित पौधे मर जाते हैं। बीज पत्रों में प्रकोप के कारण टेड़ी- मेढ़ी लकीरे बनती है। इल्ली पट्टी के शिरे से डंठल को अन्दर से खातें हुए तने में प्रवेश करती है। कीट प्रकोप से प्रारंभिक वृद्धि अवस्था (दो से तिन पत्ती ) में 20 – 30% पौधे प्रकोपित होते है। इल्ली का प्रकोप फसल कटाई तक होता है। फसल में कीट प्रकोप से 25 – 30 % उपज की हानि होती है। इस कीट के नियंत्रण के लिए लैम्ब्डा - साइहलोथ्रिन 04.90% सी.एस. @ 120 मिली को 200 लीटर पानी के साथ प्रति एकड़ छिड़काव करें।
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