सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
मेंथा की किस्मों के चयन साथ अधिक तेल प्राप्त करने के लिए!
प्रमुख प्रजातियाँ / उन्नत किस्में मेन्था प्रजातियों को उनके मुख्य अवयवों, सुगंध एवं उनकी गुणवत्ता आधार पर चार भागों में विभक्त किया जाता है। 1. जापानी पुदीना - पौधे सीधे पर फैलने वाले होते हैं। पत्तियां अंडाकार और चौड़ी होती हैं। पत्तियों को हाथ से मसलने से तेज पिपरमेंट के समान एक सुगंध पौधे के तने से 30 से 90 सेमी वाली शाखाएं निकलती हैं। सफ़ेद रंग के फूल गुच्छों में लगते हैं। मुख्य अवयव - मेंथोल और एसिटेट उन्नत किस्में- एमएस 1, कोसी, संकर 77 आर आर शिवालिक, एल 11813, गोमती, हिमालय 2. काला पुदीना पिपरमिंट- पौधे सीधे या आरोही व 30 से 100 सेमि से ऊंचे होते हैं। पौधे चिकने व शाखाएं अधिक होती हैं। इसमें मेंथॉल तकरीबन 50 प्रतिशत और मिथाइल 15 प्रतिशत में पाया जाता है। 3. स्पीयर पुदीना- पौधे चिकने, तने कमजोर, शाखा सहित होते है। पौधा 30-60 सेमी लंबा होता है। पत्तियों का डंठल बहुत छोटा, पत्तियां कम और किनारे दांतदार होते है। कारबोन लगभग 65 प्रतिशत तक होता है। पत्तियों को हाथ से मसलने पर सोया जैसी सुगंध आती है। 4. बारगामॉट पुदीना-पौधे फैलने वाले या आरोही 30-60 सेमी लंबे तने एवं शाखयुक्त होते है। पत्तियां अणडाकार होती है। पौधों पर किसी भी तरह से रोये नहीं होते है। इसमें लिग्नेलूल और लिनायल एसिटेंट 20 प्रतिशत पाया जाता है। इसकी पत्तियां को हाथ से मसलने पर धनिया जैसी सुगंध आती है। मेंथा में तेल कैसे बढ़ाएं?_x000D_ 1. कंडेंसर का पानी जल्दी –जल्दी बदलते रहना चाहिए, ताकि तेल और पानी अच्छे से अलग हो सकें। अगर सपरेटर में पहुंचने वाला तेल गर्म है तो समझिए भाप में तेल उड़ रहा है। 2. कटाई के बाद मेंथा का ढेर न लगाएं, करीब एक दिन सूखने के बाद टंकी में भर दें।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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