सलाहकार लेख enewsbihar
खरीफ फसलों के लिए खेतों की तैयारी हेतु आवश्यक सुझाव!
किसानों भाइयों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए खरीफ फसलों के लिए खेतों की तैयारी हेतु आवश्यक सुझाव।किसान खेत की ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई के महत्व से परिचित हैं। अतः ग्रीष्मकालीन गहरी जुताई कर बिना पाटा दिए खेत को छोड़ दें। इससे खेत में उगे खरपतवार उखड़ कर सुख जाते हैं। मिट्टी में छुपे कीटों की विभिन्न अवस्थाएँ खुले में आकर चिड़ियों द्वारा चुग लिया जाता है तथा रोग के कारक कड़ी धूप के कारण नष्ट हो जाते हैं। खेत की गहरी जुताई होने के कारण खेत में बना चूहों का आवास नष्ट हो_x000D_ जाता है जिससे चूहों का प्रकोप कम जाता है। इसलिए किसान खेत की गहरी जुताई कर खर-पतवार प्रबंधन का भी लाभ उठा सकते हैं तथा कीट/व्याधियों का द्वितीयक आवास से भी छुटकारा मिल सकता है।_x000D_ किसान इस समय खरीफ से संबंधित अपनी तैयारियों में निम्नांकित बिन्दुओं पर विशेष ध्यान दें:-_x000D_ 1. अच्छे उत्पादन के लिए खेत के अनुसार फसल का चुनाव करें ताकि उत्पादन स सुनिष्चित हो सकें।_x000D_ 2. खेत की ऊँची, नीची और मध्यम स्थिति के अनुसार उस क्षेत्र में लगने वाले कीट/व्याधियों के मद्देनजर धान के उन्नत एवं प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें। जैसा कि आप जानते हैं, कि ऊँची जमीन के लिए कम दिनों में तैयार होने वाली किस्में, नीचे जमीन के लिए लम्बी अवधि वाली किस्में तथा मध्यम जमीन के लिए मध्यम अवधि में तैयार होने वाली किस्में का चयन किया जाना चाहिए। आप यह भी जानते हैं कि बहुत से कीट/व्याधियों के प्रतिरोधी एवं सहिष्णु किस्में बाजार में उपलब्ध हैं, जिनपर उनका असर बहुत कम होता है। इसलिए आप भी उन्ही किस्मों का चुनाव करें जो आपके क्षेत्र में लगने वाले कीट/व्याधियों के प्रतिरोधी या सहिष्णु हों।_x000D_ 3. बीज स्वच्छ, स्वस्थ एवं पुष्ट होना चाहिए जिसमें खरपतवार के बीज मिले हुए न हों, बीज को फटककर साफ सुथरा एवं खरपतवार के बीज से रहित कर लिया जाना चाहिए। बीज की अंकुरण क्षमता 80 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए।_x000D_ इसकी जाँच के लिए सौ बीज को अंकुरण के लिए गमला या मिट्टी में डाल देना चाहिए। जितने पौधे उग जाती है वही बीज की अंकुरण क्षमता होती है। इसलिए किसान पुष्ट बीज का ही प्रयोग करें। पुष्ट बीज प्राप्त करने के लिए साधारण नमक के 10 प्रतिशत घोल में बीज को डुबायें, तैर रहे हल्के बीज को अलग कर दें और डुबे बीज को दो-तीन बार सादा पानी से धोकर छाया में सुखा लें।_x000D_ कीट/व्याधि से मुक्त फसल के बीज को स्वस्थ बीज माना जाता है, जैसा कि व्यवहार में सम्भव नहीं हैं इसलिए किसी भी बीज को मिट्टी में गिराने से पहले अनुसंषित बीजशोधक से बीजोपचार करने की सलाह दी जाती है, उपचारित बीज को स्वस्थ मानना चाहिए। सीधी बुआई वाले धान के बीज को कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत का 10 ग्राम एवं स्ट्रेप्टोसायक्लिन 1 ग्राम/10 ली पानी की दर से बने घोल में छः घंटे डुबोना चाहिए। भिगोये गए बीजों के लिएपौधशाला में बुवाई के पूर्व शोधक के घोल में बीज को 12 घंटे रखना चाहिए। फिर उसे 24 घंटे छाया में भींगे बोरे से ढ़ककर रखना चाहिए, ताकि बीज अंकुरित हो जाए। तब उसे पौधशाला में बिखेर देना चाहिए। डैपोज विधि के लिए भी ऐसा ही करना चाहिए।_x000D_ 4. पौधषाला का चुनाव छाया वाले जगह या नीची जमीन में नहीं करना चाहिए।_x000D_ 5. जिन खेतों में मूँग की खेती की गयी हो एवं मूँग का एक या दो बार फल की तुड़ाई की जा चुकी हो, का खेत में बिचड़े लगाने के 10-15 दिन पूर्व खेत में ही मुंग की जुताई कर मिलायें ताकि मूँग खेत में सँड़कर खाद के रूप में धान के लिए काम कर सकें।_x000D_ 6. जिन खेतों में ढैंचा लगाया गया हो तो इसे भी 40-50 दिनों के भीतर खेत में पलट देना चाहिए एवं इन खेतों में 10-15 दिनों के बाद धान की फसल लगानी चाहिए, ताकि ढैंचा खेत में ही सँड़कर धान के लिए खाद का काम कर सकें।_x000D_ 7. मक्का बीज का उपचार प्रति किलों बीज में 3 ग्राम कैप्टाॅन 50 प्रतिशत या 2 ग्राम कार्बेन्डाजिम मिलाकर करना चाहिए। अरहर में बीजोपचार प्रति किलो बीज में 2.5 ग्राम थीरम 75 प्रतिशत या 5 ग्राम ट्राईकोडर्मा से करना चाहिए।
स्रोत:- enewsbihar_x000D_ प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी यदि आपको उपयोगी लगी, तो इसे लाइक करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
4
0
संबंधित लेख