सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
मक्का की फसल अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए बुवाई पूर्व प्रबंधन!
अधिकतम लाभ के लिए बुवाई से पहले मिट्टी की जाँच करवाना आवश्यक है। बुवाई से पूर्व खेत में भली भांति सडी हुई 10-15 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद मिला देनी चाहिए। मक्का की संकर एवं संकुल किस्मों द्वारा अधिकतम उपज लेने के लिए खाद एवं उर्वरक की पर्याप्त मात्रा उपयुक्त समय पर ही देनी चाहिए। बुवाई के पूर्व बीजोपचार जरूर करना चाहिए। _x000D_ संकर मक्का में 100-120 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस, 40 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेअर देना चाहिए। _x000D_ बुवाई के समय सम्पूर्ण फास्फोरस एवं पोटाश की मात्रा एवं नत्रजन की आधी मात्रा कूंडों में प्रयोग करनी चाहिए। शेष नत्रजन की आधी मात्रा बराबर-बराबर मात्रा में दो बार पहली बुवाई से 30-35 दिन बाद तथा दूसरी मात्रा नर मंजरी (टैसलिंग) निकलते समय छिड़काव के रूप में देनी चाहिए। बेवीकार्न मक्का हेतु आधी नत्रजन बोते समय तथा आधी मात्रा बुवाई के 25-30 दिन बाद फसल में डाले। खाद एवं उर्वरक की मात्रा प्रजाति के पकने की अवधि पर भी निर्भर करती है। जल्दी पकने वाली प्रजातियों को 60-80 किलोग्राम नत्रजन, 60 किलोग्राम फास्फोरस तथा 40 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता होती है मध्यम व देर स पकने वाली प्रजातियों को 100-120 किलोग्राम नत्रजन की आवश्यकता होती है जबकि फास्फोरस एवं पोटाश की मात्रा वही रहती है। यदि खेत में जिंक की कमी हो तो 20 किलोग्राम जिंक सल्फेट प्रति हैक्टर की दर से अन्तिम जुताई के समय छिडकना चाहिए। इस बात का ध्यान रखें जिंक सल्फेट को फास्फैटिक उर्वरकों के साथ न मिलायें।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यदि आपको दी गई जानकारी उपयोगी लगे, तो लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें।
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