सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
सोयाबीन की फसल में में एकीकृत कीट प्रबंधन!
गर्मी में गहरी जुताई करके फसलों एवं खरपतवारों के अवशेष को नष्ट कर देना जिससे कीट/रोग के अवशेष उन्हीं के साथ नष्ट हो जायें और उनकी वृद्धि पर नियन्त्रण पाया जा सके।_x000D_ समुचित फसल चक्र अपनाया जाना चाहिए।_x000D_ फसल के प्रतिरोधी प्रजातियों के मानक बीजों की बुवाई करना चाहिए।_x000D_ हमेशा बीज को शोधित करके बोना चाहिए।_x000D_ बुवाई समय से व एकसार की जाय, पौधों से पौधों की वांछित दूरी बनाये रखी जानी चाहिए।_x000D_ उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए।_x000D_ समुचित जल प्रबन्ध अपनाया जाय।_x000D_ निराई-गुड़ाई करके समय से खरपतवारों को नष्ट करते रहें। _x000D_ सर्वेक्षण द्वारा नाशीजीव एवं उनके प्राकृतिक शत्रुओं पर बराबर निगाह रखी जाय और यदि नाशीजीव प्राकृतिक शत्रु से बराबर अधिक मात्रा में हों तभी रासायनिक उपचार अपनाया जाय।_x000D_ नाशीजीव के अण्ड समूह एंव इल्लियों को प्रारम्भिक अवस्था में नष्ट करते रहें।_x000D_ प्रकाश/फेरोमैन ट्रैप का उपयोग करके नाशीजीव के प्रौढ़ को नष्ट किया जाय।_x000D_ नाशीजीव के प्राकृतिक शत्रुओं की संख्या में वृद्धि करने के लिए उन्हें बाहर से लाकर खेतों में छोड़ा जाय।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यदि आपको दी गई जानकारी उपयोगी लगे, तो लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें।
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