सलाहकार लेखकृषि विभाग उत्तर प्रदेश
गन्ना की फसल में लाल सड़न रोग का नियंत्रण!
गन्ना की फसल में ऊपर से तीसरी तथा चैथी पत्ती सूखने लगती है साथ ही पत्ती के बीच की मोटी नस में लाल या भूरे रंग के धब्बे पडने लगते है। गन्ने को बीच की चीरने पर गूदा मटमैला लाल दिखाई पड़ता है। जिसमें से सिरके जैसी गंध आती हैं। गन्ने की पिथ में सफेद अथवा भूरी रंग की फफूॅदी भी विकसित हो जाती हैं। इसके नियंत्रण के लिए। _x000D_ रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का ही प्रयोग करना चाहिए। यदि किसी बीज गन्ने के कटे हुए सिरे अथवा गांठों पर लालिमा दिखे तो ऐसे सेट का प्रयोग नही करना चाहिए। स्वस्थ बीज गन्ना की बुवाई करना चाहिए। जिसका बीज आर्द्र गर्म वायु उपचार (54 से0 ताप पर 2.5 घण्टों तक 99 प्रतिशतआर्द्रता पर ) विधि से पूर्वोपचारित किया गया हो।पौधशालाओं के लिए खेत के चयन में समुचित जल निकास की व्यवस्था सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। ताकि वर्षा ऋतु में पानी का जमाव न हो सके। ट्राइकोडरमा 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 75 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए। स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स 2.5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से 100 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।
स्रोत:- कृषि विभाग, उत्तर प्रदेश_x000D_ यदि आपको दी गई जानकारी उपयोगी लगे, तो लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें।
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