सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
कपास की फसल में एकीकृत कीट प्रबंधन!
कपास में कीटों और रोगों का प्रबंधन एकीकृत या समन्वित रूप से करना पर्यावरण, फसल एवं मानव जाति के लिए अति आवश्यक है। कपास में एकीकृत विधि में उपयुक्त संभव उपायों को अपना कर कीटों और रोगों को ख़त्म किया जा सकता है। यांत्रिक विधियाँ 1. कपास में प्रभावित पौधों एवं पौधों के भागों को नष्ट करें। 2. कपास में कीट तथा रोग प्रभावित अधखिले फूलों को और इनकी हुई बढ़वार वाले फूलों को नष्ट करें। 3. कपास की फसल में प्रौढ़ कीटों को आकर्षित करने हेतु फेरामोन ट्रैप एवं प्रकाश पॉश का बड़े स्तर पर प्रयोग करें, ट्रैप में आए कीटों को नष्ट करें और स्टिकी ट्रैप का प्रयोग भी करें, ट्रैप में लगे ल्यूर को 20 दिनों में बदलते रहना चाहिए, ट्रैपों को फसल की ऊंचाई से 30 सेंटीमीटर ऊपर रखना चाहिए। 4. कपास के धूसर कीट से प्रभावित टिण्डों की तुड़ाई करके नष्ट कर देना चाहिए| 5. फसल जब 20 से 25 दिन की हो जाए तो उसमें निराई गुड़ाई करनी चाहिए जिससे खरपतवार नष्ट हो जायेंगे एवं फसल में अच्छी वृद्धि होगी| जैविक विधियाँ 1. कपास में एकीकृत कीट प्रबंधन हेतु क्षेत्र में परजीवी और शिकारी कीट की सुरक्षा कर संख्या बढ़ाएं। 2. रस चूसने वाले कीट, माहु, हरा तेला आदि के नियंत्रण हेतु क्राईसोपा कीट के प्रथम अवस्था लार्वा 20,000 प्रति एकड़ की दर से 15 दिन के अंतराल से दो बार फसल पर छोडें। 3. कपास की फसल में बुवाई के 40 दिन खेत में बाल वर्म दिखाई देते ही ट्राइकोग्रामा कीलोनस कपास प्रजाति के कीट छोड़ें। 4. जैविक नियंत्रण के जन्तु समूह को सुरक्षित करने हेतु कपास की हर दस कतार के बाद दो लाइनें मोठ या बाजरे की बोएं। 5. कपास में एकीकृत कीट प्रबंधन हेतु कीट खाने वाले पक्षियों (कौवा, मैना, नीलकंठ आदि) के बैठने हेतु प्रति हेक्टेयर 4 से 5 "T" आकर के ट्रैप लगाएं। रासायनिक नियंत्रण 1. आर्थिक दृष्टि से लघुतम नुकसान होने की अवस्था में आवश्यकता अनुसार उचित एवं सुरक्षित रसायनों का प्रयोग करें। 2. कपास में कीट नियंत्रण हेतु कभी भी एक कीटनाशी के साथ अन्य कीटनाशी नहीं मिलाएं। 3. कपास की फसल में एक ही रसायन का प्रयोग बार-बार नहीं करें और ऐसे कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करें जिनके उपयोग के बाद कीट बार-बार प्रकोप करते हैं। 4. सिन्थेटिक पाइरेथ्राइड का प्रयोग कम से कम करें, जैसे फैनवलरेट, साइपरमेथ्रीन, डैकामेथ्रीन, एल्फामेथ्रीन आदि। 5. नीम आधारित फार्मूला वाले रसायन का प्रयोग करें, जैसे नीम के तेल का इमल्सन 0.003 प्रतिशत और निम्बोला कीटनाशी 0.15 प्रतिशत या 6.8 किलो ग्राम पिसी हुई निम्बोली प्रति एकड़ प्रयोग में लें। 6. छिड़काव बुरकाव हेतु उपयुक्त यंत्र का प्रयोग करें, छिड़काव 10 बजे से पहले व सायं 4 बजे के बाद किया जाए जिससे शिकारी और मित्र कीटों की संख्या में कमी न हो। 7. छिड़काव हवा की दिशा में ही करें और इस प्रकार करें कि हवा पौधों की पत्तियों के ऊपर व नीचे दोनों ओर पहुँच सके। 8. खरपतवार नियंत्रण हेतु समय पर खरपतवार नाशक रसायनों का सही मात्रा में सही प्रकार प्रयोग करें और पौध संरक्षण उपकरण को साबुन से धोकर साफ करके रखें।
स्रोत:- एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यहां दी गई जानकारी आपको उपयोगी लगे तो, लाइक करें और अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें।
9
0
संबंधित लेख