AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
14 Dec 19, 06:30 PM
जैविक खेतीएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
चने की फसल में सुंडी (लट) कीट का प्रबंधन
आमतौर पर,चने की फसल की पुष्प अवस्था में बढ़ते समय ऊपर की कोपल पर सुंडी पाई जाती है। शाखाओं की मजबूत वृद्धि, कलियों का तेजी से विकास और कोमल पत्तों की अधिक संख्या होना यह सुंडी के प्रकोप के लिए कुछ अनुकूल लक्षण हैं। सुंडी के नियंत्रण के लिए निम्न जैविक उपाय हैं। उपाय: - यह कीट बारानी फसल भक्षक कीट होने की वजह से फसल चक्र अपनाना बहुत जरुरी है। फसल पुष्प अवस्था में आने के पूर्व खेत में एक एकड़ दर से 5 फेरोमेन जाल को ल्यूर लगाकर सभी जगह लगाएं। फेरोमेन जाल ल्यूर गंध से नर आकर्षित होकर मर जाते हैं। इसके कारण नर-मादा संभोग में रुकावट आकर अगली पीढ़ी पैदा होने में समस्या आती है। फेरोमेन जाल जमीन से सामन्यतः 3 से 4 फीट की ऊंचाई पर लगाया जाना चाहिए। ल्यूर लगाते समय, हाथों से प्याज, लहसुन जैसी उग्र सामग्री की गंध नहीं आनी चाहिए। ल्यूर दर 21 दिन में नियमित रूप से बदलना चाहिए। जाल में फंसी वयस्क पतंगों को नियमित रूप से हटाया जाना चाहिए, साथ ही जाल में बारिश का पानी ना होने का भी ध्यान रखना चाहिए। जैसे ही वयस्क पतंग जाल में फंस जाता है, 5% नीम के अर्क का छिड़काव करें। इसके लिए 5 किलो नीम के पाउडर को 10 लीटर पानी में रात भर भिगो दें। सुबह में, अर्क निचोड़ें और इसमें अतिरिक्त पानी डालें और 100 लीटर द्रव्य तैयार करें। यदि आवश्यक हो, तो 10 दिनों के अंतराल पर फिर से स्प्रे करें। नीम के अर्क में स्टिकर का उपयोग करें ताकि सभी छाया में नीम अर्क अच्छी तरह से फैल जाए। नीम अर्क का सुंडी कीट के शुरुआती चरणों को नियंत्रित करने के लिए निवारक छिड़काव शुरू किया जाना चाहिए। फसल में कोमल पत्तों की ऊपरी सतह पर अंडी साथ ही अंडी में से बाहर निकलने वाली सुंडियो को भी अच्छी तरह से नियंत्रित किया जाता है। सुंडी का बढ़ी अवस्था में नियंत्रण करना मुश्किल होता है। उसके लिए पुष्प अवस्था के पूर्व नीम अर्क का प्रतिबंधक छिड़काव शुरू करना चाहिए। नीम अर्क के कारण मादा कीट को पत्ती पर अंडे देने से रोकते हैं। साथ ही अंडी नाशक समज कर भी निम्बोली अर्क के छिड़कने का फायदा मिलता है। इस अवधि में, खेत में यदि प्रकाश जाल को एक एकड़ में 1 इस प्रमाण में लगाने से उसके द्वारा भी वयस्कों को आकर्षित करके बेहतर नियंत्रित किया जा सकता है। फसल में, "टी" आकार की छड़ी के कृत्रिम पक्षी ठिकाना (चिड़ियों के बैठने का अड्डा) को 25-50 एकड़ की दर से खड़े करना चाहिए। इसके वजह से पक्षियों को खेत में बैठाकर कीट को प्राकृतिक तरीक से नियंत्रित करते है। सुंडी के जैविक नियंत्रण के लिए, हेलिकोवेर्पा सुंडी का विषाणु अर्क की एच.ए.एन.पी.वी 250 एल ई की 100 मिली प्रति 200 लीटर के साथ छिड़काव करना चाहिए। इसके अलावा, पतंग वर्गीय कीटों के नियंत्रण के लिए उपयुक्त रहने वाले बेसिलस थुरिंजेनसिस के बाजार में उपलब्ध रहने वाले विभिन्न फॉर्म्युलेशन का उपयोग सुंडी को बेहतर ढंग से नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। संदर्भ - एगोस्टार एग्रोनॉमी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगती है, तो फोटो के नीचे पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए गए विकल्प के माध्यम से अपने सभी कृषक मित्रों के साथ साझा करें।
144
4