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पशु चारा
हरे चारे हेतु बरसीम की किस्में (जे बी- 1, जे बी- 5, वरदान)जई की किस्में (जवाहर जई- 1, जे एच ओ- 822), रिजका की किस्में ( आनंद- 2, टी- 9) का उपयोग करें।
आज का सुझाव  |  AgroStar एग्री-डॉक्टर
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अमरूद में नेमाटोड की रोकथाम
अमरूद में नेमाटोड की रोकथाम के लिए सूत्रकृमी नियंत्रण कवक पेसियोलोमायसिस लीलासिनस (Paecilomyces lilacinus) 1 लीटर प्रति एकड़ ड्रिप के द्वारा देना चाहिए।
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पशुपालन के लिए अच्छी नस्ल का चयन करें।
समय आ गया है जब हमें अपनी घरेलू नस्ल के साथ पशुपालन का अभ्यास करना चाहिए। घरेलू नस्लों में विशेष प्रति रोधक क्षमता होती है; इसलिए, हमें अपनी देसी नस्ल की गायों और भैंसों...
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टमाटर में अगेती एवं पछेती झुलसा रोग की रोकथाम
टमाटर की फसल में अगेती एवं पछेती झुलसा रोग की रोकथाम के लिए एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% w/w + डाईफेनाकोनाज़ोल 11.4% w/w एस.सी. @ 200 मिली प्रति एकड़ 200 लीटर पानीमे घोलकर...
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पपीता में जड़ सड़न की समस्या एवं दीमक कीटका प्रबंधन
पपीता में जड़ सड़न की समस्या एवं दीमक कीट की रोकथाम के लिए क्लोरोपायरीफास 20% ई.सी. @ 2 मिली प्रति लीटर पानी + कार्बेनडाज़िम 50% डब्लू.पी. @ 1 ग्राम प्रति लीटर पानी में...
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पशुओं का स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है।
यूरिया डालने के 15-20 दिनों के बाद ही पशु को चारा खिलाएं; यदि पशुओं में विषाक्तता देखी जाती है, तो पशुओं को तुरंत निकटतम पशु चिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।
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नींबू में कैंकर रोग का प्रबंधन
नींबू में इस माह केंकर रोग फैलने ली आशंका रहती है। इसीलिए रोग ग्रसित पत्तियां एवं टहनियों को काट कर जला दें एवं कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 50% डब्ल्यू. पी.@ 45 ग्राम + स्ट्रेप्टोसाइक्लीन...
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पपीता में विषाणु जनित रोग लीफ कर्ल की रोकथाम
पपीता में विषाणु जनितरोग लीफ कर्लकी रोकथाम हेतुरोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर नष्ट करें एवं रोग वाहक कीट सफेद मक्खी के नियंत्रण के लिए डायफेन्थुरान 50% डब्ल्यू.पी. @ 250...
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पशुओं के पैरो की अच्छे से देखभाल करें।
एक स्थान पर बंधे पशुओं के नाखूनों को समय-समय पर काटा जाना चाहिए लंबे नाखूनों से पशुओं की आवाजाही में दिक्कत हो सकती है। पशु लँगड़ा के चलता है जिससे पशुओं को दर्द होता है।
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भिंडी में फल छेदक इल्ली का नियंत्रण
भिंडी की फसल में फल छेदक इल्ली के नियंत्रण के लिए फ्लूबेंडामाइड़ 20% डब्ल्यू. जी.@ 50 ग्राम प्रति एकड़ 200 लीटर पानी या क्लोरोन्ट्रेनिलीप्रोल 18.5%एस.सी. @ 60 मिली प्रति...
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मिर्च में सफेद मक्खी का नियंत्रण
मिर्चकी फसल में सफेद मक्खी के प्रकोप की प्रारंभिक अवस्था में नीम तेल 1500 पीपीएम 1 लीटर प्रति एकड़ 200 लीटर पानी मे घोलकर छिडकाव करें। अधिक प्रकोप की अवस्था मे सफेद...
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पशु स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है
पशुओं को दूषित पानी से दूर रखने के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उचित व्यवस्था करना चाहिए। प्लास्टिक की थैलियों में कचरे को बांध कर न फेंके और प्लास्टिक की थैलियों...
आज का सुझाव  |  एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
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टमाटरमें पुष्प एवं फल झड़न की रोकथाम
टमाटर की फसल में फूल एवं फल झड़ने की रोकथामके लिए पुष्पन अवस्था पर प्लानोफिक्स (अल्फा नेप्थिल एसिटिक एसिड) 4.5% एस. एल.@ 3.3 मिली प्रति 15 लीटर पानी मे घोलकर 20 दिन...
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मिर्च में थ्रिप्स का नियंत्रण
मिर्च की फसल में थ्रिप्स के प्रकोप की प्रारंभिक अवस्था में नीम तेल 1500 पीपीएम 1 लीटर प्रति एकड़ 200 लीटर पानी मे घोलकर छिडकाव करें। फसल में अधिक प्रकोप की अवस्था मे...
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पशु स्वास्थ्य महत्वपूर्ण है
अपने पशुओं को कीटनाशक छिड़काव वाले चारे को न खिलाएं। चारा देने से पहले चारे को साफ पानी से उचित रूप से धो कर खिलाएं। पशुपालक अपने पशुओं को कारखानों या औद्योगिक क्षेत्रों...
आज का सुझाव  |  एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
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मटर में खाद एवं उर्वरक उपयोग
मटर की अच्छी पैदावार लेने के लिए खाद एवं उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही किया जाना चाहिए। यदि मिट्टी की जांच न की गई हो तो कम मात्रा में खाद एवं उर्वरक...
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AgroStar Krishi Gyaan
Maharashtra
13 Oct 19, 06:00 AM
टमाटर की फसल में ड्रिप का उपयोग एवं रोपण पद्धति
टमाटर की संकर किस्मों को उठी हुई क्यारी पर 120 सेमी.पंक्ति से पंक्ति एवं 40 सेमी.पौधे से पौधे की दूरी पर रोपण करें। इस पद्धति में ड्रिप द्वारा सिंचाई की जाती है एवं...
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पशुओं को दूषित भोजन से दूर रखें।
जानवरों को कभी-कभी दूषित घास या भोजन,दवाएँ और कीटनाशक खाद्य पदार्थ युक्त के साथ खिलाया जाता है। जिसमें ड्रग्स, यह प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जानवर के शरीर में...
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मटर का बीजोपचार
मटर की फसल को उकटा एवं जड़ सड़न रोग से बचाने के लिए थायरम 2 ग्राम + कार्बेन्डाजिम 1 ग्राम प्रति किलोग्राम या ट्राइकोडर्मा 4 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से बीज उपचारित...
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चने में खाद एवं उर्वरक का उपयोग
चने की अच्छी उपज के लिए खाद एवं उर्वरकों का उपयोग मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही किया जाना चाहिए। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 50 किलोग्राम डीएपी, 15 किलोग्राम म्यूरेट...
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