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AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
31 Oct 19, 10:00 AM
गुरु ज्ञानएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
दीमक का पूर्व नियंत्रण के लिए गेहूं का बीजोपचार
गेहूं के फसल की खेती शीतकालीन अनाज फसल के रूप में की जाती है। गेहूं की खेती सिंचित या असिंचित दोनों तरह से की जा सकती है। इस वर्ष, मानसून अच्छा रहा और पर्याप्त से अधिक वर्षा देखी गई। इसलिए, असिंचित क्षेत्र में भी किसान इस फसल की बुवाई कर सकते हैं। यह फसल अंकुरण के बाद दीमक के कारण क्षतिग्रस्त हो सकती है। दीमक का संक्रमण आम तौर पर भारी और काली मिट्टी में कम होता है। इस कीट के कारण रेतीली, दोमट मिट्टी में नुकसान अधिक गंभीर होता है। दीमक की रानी वर्षों तक लगातार अंडे देती है और दीमक की रानी का नियंत्रण असंभव है, क्योंकि यह मिट्टी में 7-8 फीट नीचे रहती है। एक बार, दीमक क्षेत्र में व्यवस्थित हो जाते हैं, तो प्रत्येक वर्ष संक्रमण देखा जाता है।
दीमक पौधे के भागों को मिट्टी की सतह पर काटते हैं और जड़ प्रणाली को खाते हैं। नतीजतन, पौधे पीले पड़ कर सूखने लगते हैं। ऐसे संक्रमित पौधों को आसानी से मिट्टी से बाहर निकाला जा सकता है। प्रकोपित भाग में संक्रमण देखा जाता है। सिंचाई लम्बा करने पर संक्रमण बढ़ जाता है। दीमक प्रारंभिक अवस्था और बाली आने की अवस्था में नुकसान पहुंचाते हैं। गेहूं की बुवाई पर नियंत्रण के उपाय करें: • गेहूं की बुवाई से पहले खेत से पहले की फसल अवशेषों को हटा दें और नष्ट कर दें। • क्षेत्र में केवल अच्छी तरह से विघटित गोबर खाद लागू करें। • खेत में खाद के स्थान पर, किसान अरंडी, नीम या करंज केक @1 टन प्रति हेक्टेयर भी लगा सकते हैं। • कम लागत पर बुआई से पहले बीज उपचार देकर दीमक का प्रबंधन किया जा सकता है। बीजोपचार के लिए बिफेंट्रिन 10 ईसी @200 मिली या फिप्रोनिल 5 % एस.सी. @ 500 मिली या क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी @ 400 मिली और 100 किलो बीज में 5 लीटर पानी में मिलाएं। बीज को पक्के फर्श या प्लास्टिक शीट पर फैलाएं और गेहूं पर इस पतले घोल का छिड़काव करें। हाथों में रबर के दस्ताने पहनें और अच्छी तरह मिलाएं। उपचारित बीज को सूखने के लिए रात भर रखा जाना चाहिए और अगले दिन सुबह बुवाई के लिए उपयोग करना चाहिए। • यदि बीज उपचार नहीं दिया जाता है और दीमक का संक्रमण देखा जाता है, तो 100 किलोग्राम रेत के साथ फिप्रोनिल 5 एससी 1.5 लीटर या क्लोरपायरीफॉस 20 ईसी 1.5 लीटर मिलाएं। उन्हें खड़ी फसल में छिड़काव कर हल्की सिंचाई करें। • नियमित रूप से सिंचाई कर फसल में नमी बनाए रखें। डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत) यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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