AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
18 Nov 18, 06:00 PM
पशुपालनएग्रोवन
सही समय पर कराये टीकाकरण
जानवरों की बीमारी को प्रभावित करने के लिए बीमारी की प्रतीक्षा किए बिना समय-समय पर अनुसूचीनुसार टीकाकरण करवाया जाना चाहिए। प्रतिरक्षा बनाने के लिए जानवरों को क्षार और विटामिन की गुणवत्ता की आपूर्ति करनी चाहिए। टीकाकरण के लाभ • बीमारी प्रसार की प्रतीक्षा किए बिना अनुसूची द्वारा टीकाकरण करावा लेना चाहिए। • महामारी शामिल होने से पहले टीकाकरण के कारण प्रतिरक्षा विकसित करने में दो से तीन सप्ताह लगते हैं। इसलिए, बीमारी आने से पहले जानवरों के शरीर में प्रतिरक्षा प्रणाली बनाई जाती है। आगे आनेवाले मुसीबत से बचा जा सकता है। टीकाकरण करनेके लिए सही उम्र - • डिफ़्टेरिया और फेय रोग को नियंत्रित करने के लिए छह महीने के बछड़े या पुराने जानवरों में टीकाकरण किया जाना चाहिए। • यदि लार्वा के बीमारी में अगर बछड़ा की माँ का टीकाकरण नहीं किया है, तो छह से सात सप्ताह उम्र तक के बछड़े और उनके अगले जानवरों को किया जाना चाहिए। • एंटरोब्लास्ट रोग का टिका बछड़े की माँ को नहीं दिया जाता है तो, इसे बछड़े के पहले सप्ताह में दिया जाना चाहिए और यदि टीका दिया गया है, तो चार से छह सप्ताह उम्र तक के बछड़े को टीका दिया जाना चाहिए।
बीमारी प्रभावित होने के बाद किये जाने वाले परहेज - • बीमार जानवरों को स्वस्थ जानवरों से अलग रख के उन्हे उनकी जगह पे घांस खिलाएं, पानी प्रदान करें। घांस खिलानेके लिए बाहर नहीं छोड़ना चाहिए। • तालाब, नदी नाले में पानी न पिलाएँ। • बीमारी की संक्रमण लगे हुए जानवरों का सही समय पर इलाज करें। • महामारी आये हुए क्षेत्रों में जानवरों को नहीं ले जाना चाहिए। उस इलाके के जनवरोंकोभी दूसरी जगह नहीं ले जाना चाहिए। • महामारी क्षेत्रों में बाजारों को, प्रदर्शनियों को बंद रखें। • मृत जानवरों के साथ-साथ ही दूषित मलमूत्र, चारा का सही जगह पर निपटान करें। • जानवरोंके पशु छाया में कीटाणुशोधन करना चाहिए। संदर्भ - अॅग्रोवन
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