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AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
17 Oct 19, 10:00 AM
गुरु ज्ञानएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
अनार में फल छेदक (ड्यूडोरिक्स इसोक्रेट्स)
अनार की खेती भारत में औसतन 109.2 हजार हेक्टेयर में की जाती है। फलों की फसल में, अधिकांश कीट अनार को नुकसान पहुंचा रहे हैं, इसमें सबसे ज्यादा फल छेदक नुकसान पंहुचा रहा हैं, अनार की फसल में फल छेदक के कारण 50% से अधिक हानि देखी जा सकती है। मादा तितली अनार के पुष्प और बनते फलों पर या फल के पास वाली पत्तियों पर या तने पर एक-एक कर अण्डे देती है। अण्डे से 7 से 10 दिनों में इल्ली निकल कर बनते हुए फलों में प्रवेश कर जाती है, जोकि फलों के अन्दर बीजों को खाती रहती है, जिससे फल सड कर नीचे गिर जाते है। कवक और जीवाणु इल्ली द्वारा किये गए छेद के अंदर प्रवेश करते हैं। संक्रमित फलों से दुर्गंध निकलती है। फल सड़ जाते हैं और गिर जाते हैं। छेद अंततः फल के बाकी हिस्सों को रोग के रूप में उजागर करते हैं, और आम तौर पर पेड़ से सड़ जाते हैं। अनार के अलावा यह कीट आंवला, लीची, आड़ू, सेब, बेर, अमरूद और चीकू को भी नुकसान पहुंचाता है।
एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम): 1. खरपतवार को हटाकर स्वच्छ बाग बनाए रखें। 2. बाग में प्रकाश प्रपंच स्थापित किया जाना चाहिए। 3. छेद वाले फल को इकट्ठा करें और नष्ट कर दें। 4. गिरे हुए फलों को समय-समय पर इकट्ठा करके नष्ट करें। 5. जब फल नींबू के आकार को प्राप्त करता है। एक पेपर या बटर पेपर कोन के आकार का कैप या पेपर बैग को 30-50 दिन तक रखने पर नुकसान की मात्रा को कम किया जा सकता है। 6. अंडे परजीवी ट्राइकोग्रामा एसपी को 2 - 3 बार@ 1 लाख प्रति एकड़ छोड़ा जाना चाहिए। 7. संक्रमण होने पर नीम के बीज की गिरी पाउडर@ 500 ग्राम (5%) प्रति एकड़ या नीम आधारित कीटनाशकों@ 10 मिलीलीटर (1% ईसी) से 40 मिलीलीटर (0.15% ईसी) प्रति 10 लीटर पानी के साथ छिड़काव करना चाहिए। 8. बैसिलस थुरिंगिनेसिस, एक जीवाणु आधारित पाउडर@ 15 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें। 9. संक्रमण बढ़ने पर, परिपक्व फलों को लेने के बाद कीटनाशकों दवाओं को छिड़काव करने की सिफारिश की जाती है। 10. इण्डोक्साकार्ब 14.5 एस सी 0.5 मिलीलीटर, कार्बारिल 50 डब्ल्यू जी 4 ग्राम या डाइक्लोरोवास 76 ई सी 1 मिलीलीटर या मेलाथियान 2 मिलीलीटर या स्पाइनोसेड 45 एस सी 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फूल तथा फल बनते समय छिड़काव करे। डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत) यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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