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AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
18 Jul 19, 10:00 AM
गुरु ज्ञानएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
सहजन में कीट प्रबंधन
सहजन की खेती किसानों के लिए बेहद किफायती है। हालांकि, कुछ कीट फसल को संक्रमित करते हैं। मुख्य रूप से लीफ माइनर (घुन कीट) सह वेब निर्माण सुंडी (इल्ली), फल छेदक, रस चूसक कीट (सफेद मक्खी, स्केल कीट, थ्रिप्स और हरा तेला) और छाल खाने वाले कीट, तना छेदक और फल मक्खी फसल को नुकसान पहुंचाते हैं। वेब निर्माण सुंडी (इल्ली) संक्रमित सहजन फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाते है। एकीकृत कीट प्रबंधन (आईपीएम) • खेत में एक प्रकाश जाल स्थापित करें। • कीट संक्रमण की शुरुआत में, हम नीम के बीज की गिरी का अर्क 5% (500 ग्राम) या नीम आधारित घोल @10 मिली (1% ईसी) दोनों रस चूसने वाले और काटने वाले दोनों तरह के कीटों को नियंत्रित करते हैं। इन्हें दूर करने के लिए हम जैव कीटनाशकों का भी उपयोग कर सकते हैं। जैसे, वर्टिसिलियम लेकानी या बेवेरिया बेसियाना, फफूंद आधारित पाउडर @40 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें। • गिरी और संक्रमित फली को नियमित रूप से इकट्ठा करें और उन्हें मिट्टी में दफना कर नष्ट करें। • समय-समय पर गिरी हुए संक्रमित फलीयों को इक्कट्ठा करके एक गड्ढे में दफनाएं और फली मक्खी को रोकने के लिए मिट्टी की मोटी परत से उसे ढक दें। • फल मक्खी के संक्रमण को कम करने के लिए, फली निर्माण अवस्था के दौरान पहले नीम आधारित कीटनाशकों का छिड़काव करें, और 35 दिनों के बाद दुबारा छिड़काव करें।
डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत) यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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