AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
24 Jun 19, 10:00 AM
सलाहकार लेखअपनी खेती
(भाग -2) औषधीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी- अश्वगंधा
नर्सरी प्रबंधन और रोपाई रोपाई करने से पहले, खेतों की एक बार हल से जुताई करें फिर ताई से मिट्टी के भुरभुरा होने तक दो बार जुताई करें और मिट्टी को पोषक बनाने के लिए जैविक तत्वों को डालें। नर्सरी बेड को सतह से ऊपर उठाकर उपचार किए गए बीजों को बोने के लिए प्रयोग करें। रोपाई से पहले, 10-20 टन रूडी की खाद, यूरिया 15 किलो और 15 किलो फॉस्फोरस मिट्टी में मिलाएं। बीज 5-7 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं और लगभग 35 दिनों में रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं। रोपाई से पहले, आवश्यकता के अनुसार पानी दें ताकि नए पौधों को आसानी से निकाला जा सके। 60 से.मी. के फासले पर मौजूद 40 से.मी. की चौड़ी मेड़ों पर रोपाई करें। उर्वरक का प्रबंधन खेत की तैयारी के दौरान, प्रति एकड़ लगभग 4-8 टन रूडी खाद डालें और मिट्टी में अच्छी तरह मिलाएं। फिर खेत को समतल करें। इसमें किसी भी रासायनिक उर्वरक या कीटनाशक का उपयोग करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह एक चिकित्सा पौधा है और जैविक खेती द्वारा उगता है। कुछ जैविक खादें जैसे रूड़ी खाद, वर्मी कम्पोस्ट, हरी खाद आदि का उपयोग आवश्यकतानुसार किया जा सकता है। कुछ जैव कीटनाशक, जो नीम, धतूरा, गोमूत्र आदि से बनाये जाते हैं, का उपयोग मिट्टी और बीज से उत्पन्न होने वाली बीमारियों को रोकने के लिए किया जा सकता है। मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन (यूरिया 14 किग्रा) और फास्फोरस 6 किलो (सिंगल सुपर फास्फेट 38 किग्रा) प्रति एकड़ की आवश्यकता होती है। खर-पतवार नियंत्रण खेत को खर-पतवार मुक्त करने के लिए, दो बार निराई-गुड़ारई की आवश्यकता होती है। पहली बुवाई के 20-25 दिनों बाद और दूसरा इसके 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए। खर पतवार के नियंत्रण के लिए एसोप्रोट्यूरॉन 200 ग्राम और ग्लाइफोसेट 600 ग्राम प्रति एकड़ डालें। सिंचाई अनावश्यक पानी और बारिश से अश्वगंधा की फसल को नुकसान होता है। यदि अधिक बारिश है तो सिंचाई की आवश्यकता नहीं है, इसके अलावा 2 बार सिंचाई काफी है। सिंचित स्थितियों में फसल की सिंचाई 10-15 दिन में करें। पहली सिंचाई उगने के 30-35 दिन बाद और दूसरी सिंचाई पहली सिंचाई के 60-70 दिनों के बाद करनी चाहिए। फसल की कटाई इसकी फसल 160-180 दिनों में तैयार हो जाती है। कटाई सूखे मौसम में करें, जब पत्ते सूख रहे हो और फल लाल संतरी रंग के हो जायें। कटाई हाथों से जड़ों को उखाड़कर या मशीन द्वारा बिना जड़ों को नुकसान पहुंचाए की जाती है,जैसे कि पावर टिल्लर या कंट्री प्लो आदि के साथ। स्रोत – अपनी खेती
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