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AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
14 Feb 19, 01:00 PM
कृषि वार्ताकृषि जागरण
धान की नई किस्में जो देंगी अधिक पैदावार!
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर) द्वारा धान की नई किस्में विकसित की गई हैं। धान की यह किस्में अब पैदावार को बढ़ाएंगी और साथ ही किसानों को दोहरा मुनाफा भी देंगी। सी.एस.आर-46 यह धान की किस्म 130 से 135 दिन में तैयार होती है। इसमें 100 से 105 दिन बाद फूल आने शुरू हो जाते है। पौधों की लंबाई 115 सेमी. होती है। यह किस्म (NDRK 50035) के मुकाबले 36% अधिक पैदावर देती है। इसे सामान्य भूमि में उगाया जा सकता है। यह 65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पैदावर दे सकती है। यह बंजर (कलराठी) भूमि में 40 क्विंटल तक पैदावार दे देती है। सी.एस.आर-56 यह किस्म 120 से 125 दिन में तैयार होती है। इसमें 90 से 95 दिन में फूल आते हैं और पौधे 100 सेमी. तक होते है। विभिन्न प्रकार की मिट्टी से औसतन 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज मिल जाती है। जबकि, नरम/लवणीय मिट्टी में 43 क्विंटल उपज मिल जाती है। सी.एस.आर-36
यह तैयार होने में 125 से 130 दिन लेती है। यह लवणीय भूमि को सहने में सक्षम है। यह अधिक उपज देने वाली धान की किस्म बी.पी.टी 2204 और (जया के मुकाबले क्रमश: 9%, 53% और 43% अधिक उपज देती है। यह किस्म प्रति हेक्टेयर 70 क्विंटल तक उपज दे देती है। तीनों किस्में लीफ ब्लास्ट, नैक ब्लास्ट, शीथ रॉट, बैक्टीरियल लीफ ब्लाइट, ब्राउन स्पॉट रोगों को सहने में सक्षम है। साथ ही लीफ फोल्डर (पत्ती मुड़ना) और वाइट बैक्ड प्लांट हॉपर (तैला) कीटों के प्रकोप को सहने में सक्षम है। आईसीएआर ने इन तीनों धान की किस्मों के उत्तरी भारत के मैदानी क्षेत्रों में उगाने की संस्तुती कर दी है। स्रोत – कृषि जागरण, 09 फरवरी 2019
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