AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
13 Dec 18, 10:00 AM
गुरु ज्ञानएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
गन्ने में पायरिल्ला की व्यवस्था इस प्रकार करें
यह कीट बहुत सक्रिय होते है और एक पत्ते से दूसरे पत्ते तक छलांग लगाते है। जब इन कीटों संख्या अधिक (घनत्व) होती है तो टिक-टैक ध्वनि सुनाई देती है। दोनों निम्फ और वयस्क कीट पत्तियों से कोशिकाओं के रस को चूसते है। इनके प्रभाव से गन्ने की पत्तियां पीले रंग की हो जाती हैं और सूख जाती है। शुगर और गुड़ के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देता है। पायरिल्ला संक्रमण के कारण, पत्ते धूमिल फफूंद के विकास के कारण काले रंग में बदल जाती हैं और इनकी प्रकाश संश्लेषण गतिविधि में बाधा बनती हैं।
एकीकृत व्यवस्था: · पायरिल्ला द्वारा रखे गए अंडों को इकट्ठा करें और उन्हें नष्ट कर दें। · मेटारिज़ियम अनिसोप्लिए कवक आधारित पाउडर @ 40 प्रति 10 लीटर पानी का छिड़काव करें। · इस कीट का बाह्यपरजीवी, इपीरीकैनिआ मिलैनोल्यूका द्वारा व्यवस्था की जा सकती है। · उस क्षेत्र में जहां इन बाह्यपरजीवी की संख्या कम या अनुपस्थिति होती है, वही उस क्षेत्र से इकट्ठा करें जहां ज्यादा मात्रा में संख्या मौजूद हो और मुक्त हो। अंडों के ढेर को इकट्ठा करें या इस परजीवी के प्यूपाओं के पत्ते को काटें और इन कट टुकड़ों को गन्नें के पत्तों के नीचे की ओर रखें। एक हेक्टेयर में, एक लाख परजीवी या 250 अंडों का ढेर या 2000 प्यूपाओं की आवश्यकता होती है। . जहां परजीवी मुक्त देखी जाती है या यदि अधिक संख्या में दिखाई देते है उन क्षेत्रों में छिड़काव न करें। · जहां परजीवी की संख्या को देखा या देखा नहीं गया है उन क्षेत्रों में , पायरिल्ला के नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफोस 20 ईसी @ 20 मि.ली.या मोनोक्रोटोफॉस 36 ईसी @ 10 मि.ली. प्रति 10 लीटर पानी छिड़काव करें। डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत)
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