AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
16 Jul 18, 10:00 AM
सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
पोषक तत्वों की एकीकृत व्यवस्था और उनके लाभ
पोषक तत्वों की एकीकृत व्यवस्था का मतलब है, पोषक तत्वों के सभी विभिन्न स्रोतों का उपयोग करके उनकी प्रभावकारिता में वृद्धि करना, जिसमें से पोषक तत्व उपलब्ध कराए जाते हैं जैसे रासायनिक और जैविक उर्वरक, कार्बनिक उर्वरक, फसल अवशेष, हरी फसलें, फसल चक्रिकरण और द्विबीजपत्री फसलें और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखकर फसल उपज में वृद्धि करना होता है। एकीकृत पोषक तत्व व्यवस्था के लाभ 1. फसलों को संतुलित पोषक तत्व प्रदान कर सकते हैं। 2. संतुलित उर्वरकों के कारण, फसलों की जड़ें अच्छी तरह से विकसित होते हैं और फसल की उपज में वृद्धी होती है । 3. कार्बनिक और जैविक उर्वरकों के कारण रासायनिक उर्वरकों की प्रभावकारिता और उपयोगिता बढ़ जाती है। 4. फसल चक्रीकरण विधि में पहली फसल के लिए उपयोग किए जाने वाले कार्बनिक उर्वरकों का उपयोग अगली फसल के लिए भी उपयोगी है।
5. मिट्टी के भौतिक गुणों में (जैसे पानी की धारण क्षमता, हवादार, मिट्टी हवादार बनाना आदि) 6. रासायनिक उर्वरकों की क्षमता और उपयोगिता बढ़ जाती है। 7. अघुलनशील पोषक तत्व घुलनशील पोषक तत्वों में परिवर्तित होते हैं और फॉस्फोरस, पोटाश, सूक्ष्म पोषक तत्वों की उपलब्धता में वृद्धि की जा सकती है। नाइट्रोजन उपलब्धता को आवश्यकतानुसार रखा जा सकता है। 8 मिट्टी की धारण क्षमता, जैव रासायनिक प्रक्रियाओं का संतुलन बनाए रखा जाता है। 9 उपयोगी बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है। 10 मिट्टी में कार्बन, नाइट्रोजन की मात्रा को बनाए रखा जाता है। 11 अगले फसलों के पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढ़ाने और विशेष रूप से नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए उचित फसल चक्रिकरण और अंतर फ़सल विधि सहायता करती है। 12 यदि फसल अवशेषों का उपयोग मिट्टी में मल्चिंग के रूप में और फिर जैविक खाद के रूप मेंं किया जाता है, तो हम पानी, मिट्टी के साथ-साथ पोषक तत्वों को भी संरक्षित कर सकते हैं। एग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस, 12 जुलाई 18
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