AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
30 May 19, 10:00 AM
गुरु ज्ञानएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
आम की पत्तियों को मुरझाने वाली इल्ली का संक्रमण
आम की पत्तियों को मुरझाने वाली इल्ली (लीफ वेबर्स) पिछले 20-25 वर्षों से देखी जा रही है लेकिइससे कोई नुकसान नहीं हुआ। लेकिन हाल ही में गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में पहली बार आम के फल और पत्तियों को इनसे नुकसान देखा गया। इसका प्रकोप अन्य क्षेत्रों और पड़ोसी राज्यों में भी फैल सकता है। आमतौर पर अप्रैल से नवंबर के दौरान इसका संक्रमण होने की संभावना अधिक रहती है। नुकसान यह इल्ली पत्तियों के ऊपरी भाग (एपिडर्मिस) को खाती है। इसके बाद उनका जाल बनाकर अंदरूनी हिस्से को खाता है। इस साल इसका नुकसान आम के फलों पर भी देखा जा रहा है। यदि फल के ऊपर की ओर से संक्रमण शुरू होता है, तो फल गिर सकता है। परिणामस्वरूप, फलों की गुणवत्ता बुरी तरह से प्रभावित होती है और यह बिक्री और इस्तेमाल के लिए बेकार हो जाता है।
एकीकृत प्रबंधन: • नियमित रूप से सड़े हुए गिरे फलों को इकट्ठा करें और नष्ट करें। • समय-समय पर इल्ली द्वारा बनाई गई क्षतिग्रस्त पत्तियों और पत्तियों के जाले को काटें और नष्ट करें। • पेड़ों को पर्याप्त हवा और सूरज की रोशनी मिलने के लिए नियमित छंटाई करें। • बाग में अप्रैल से नवंबर के दौरान प्रकाश जाल स्थापित करें। • बुवेरिया बेसियाना@40 ग्राम /10 लीटर पानी या नीम के बीज का काढ़ा@ 5% या नीम आधारित सूत्रीकरण 1500 पीपीएम या 10000 पीपीएम @ 10 मिली से 40 मिली प्रति 10 लीटर पानी में 10 से 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव करें। • संक्रमण बढ़ने पर, प्रोफेनोफॉस 50 ईसी @ 10 मिली या नोवल्यूरोन 10 ईसी @ 10 मिली या लैंबडा साइहेलोथ्रिन 5 ईसी @ 10 मिली प्रति 10 लीटर पानी में छिड़काव करें। • आम के फलों पर छिड़काव और फलों की तुड़ाई के बीच उचित अंतराल बनाए रखें। डॉ. टी.एम. भरपोडा, एंटोमोलॉजी के पूर्व प्रोफेसर, बी ए कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, आनंद कृषि विश्वविद्यालय, आनंद- 388 110 (गुजरात भारत) यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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