AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
23 May 19, 10:00 AM
गुरु ज्ञानGOI - Ministry of Agriculture & Farmers Welfare
कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा फॉल आर्मी वर्म के लिए सलाह
हाल ही में, कृषि विभाग, सहकारिता और किसान कल्याण, भारत सरकार ने मक्का में फॉल आर्मीवॉर्म के प्रबंधन के लिए कुछ कदम सुझाए हैं। मक्के के खेत में फॉल आर्मीवर्म से काफी नुकसान पहुंचता है और इसका प्रबंधन काफी कठिन हो सकता है। मक्के की देर से बुवाई वाली किस्म और देर से पकने वाली किस्मों पर फॉल आर्मीवर्म के संक्रमण की अधिक संभावना है। फॉल आर्मीवर्म मक्का फसल को पत्ती से लेकर मक्के के कोब तक गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। यह फसल के सभी चरणों को नुकसान पहुंचाते हैं। फॉल आर्मीवर्म को प्रभावी रूप से केवल पहले इंस्टार लार्वा चरण में प्रबंधित किया जा सकता है। एक बार यह मक्के के कोब में प्रवेश कर गए तो इन्हें नियंत्रित नहीं कर सकते हैं।
यह कीट 100 से अधिक फसलों (कई अनाज फसलों, सब्जियों और जंगली पौधों) को संक्रमित कर सकता है लेकिन भारत में यह मक्का में पाया जाता है। फॉल आर्मीवर्म मुख्यतः अमेरिका के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्र का कीड़ा है, फिर दक्षिण-पश्चिमी नाइजीरिया और बाद में अफ्रीका में फैल गया। भारत में, इसे पहली बार मई 2018 के मध्य में शिवमोग्गा, कर्नाटक और बाद में अन्य राज्यों यानी तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और तमिलनाडु में देखा गया था। किसानों को सलाह दी जाती है कि रात में मक्के की फसल को बर्बाद करने वाले इस कीट के प्रबंधन के लिए कुछ कदम उठाएं। जैसे - गर्मियों में गहरी जुताई से परभक्षी प्यूपे को देख पाते हैं और उन्हें खा जाते हैं साथ ही सूर्य के प्रकाश से मिट्टी में मौजूद कीट नष्ट हो जाते हैं। मक्के के साथ क्षेत्र की उपयुक्त दलहनी फसलों का अंतर-फसल (मक्के + अरहर/ काला चना/ हरा चना)। खेत में कीट की जांच के लिए 5 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ स्थापित करें। साप्ताहिक अंतराल पर ट्राइकोग्रामा प्रेटीओसम या टेलीनोमस रेमुस परजीवी @ 50,000 प्रति एकड़ छोड़ दें या 3 पतंगे / ट्रैप पर पकड़ें। मेटाराइजियम अनिसोपलिए पाउडर फार्मयुलेशन @ 75g या बेसिलस थुरिंजेंसिस। प्रभावी रासायनिक प्रबंधन के लिए, बीज को साइंट्रानिलिप्रोएल 19.8% + थियामेथोक्जाम 19.8% @ 4 मिली प्रति किलोग्राम बीज के साथ उपचारित किया जाना चाहिए। पौधे के अंकुर के चरण में एनएसकेई 5% / अजाडिराक्टीन 1500 पीपीएम@ 5 मिली पानी का छिड़काव करें। बाद में, पत्ती के विकास चरण के दौरान, इमामैक्टिन बेंजोएट @ 0.4 ग्राम / लीटर पानी या स्पिनोसैड @ 0.3 मिली / लीटर पानी या थियामेथोक्साम 12.6% + लैम्ब्डा साइहैलोथ्रिन 9.5% @ 0.5 मिली / लीटर पानी या क्लोरेंट्रानिलिप्रोएल 18.5% एससी @ 0.3 मिली / लीटर पानी छिड़काव करें। बहुत बाद के चरण में इसे प्रबंधित करना बहुत मुश्किल हो सकता है, इसलिए किसानों को कीट के प्रबंधन के लिए अग्रिम कार्रवाई करने की सलाह दी जाती है। स्रोत: भारत सरकार कृषि और किसान कल्याण विभाग, कृषि, सहयोग और किसान कल्याण विभाग। भारत सरकार - कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय यदि आपको यह जानकारी उपयोगी लगे, तो फोटो के नीचे दिए पीले अंगूठे के निशान पर क्लिक करें और नीचे दिए विकल्पों के माध्यम से अपने सभी किसान मित्रों के साथ साझा करें।
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