AgroStar Krishi Gyaan
Pune, Maharashtra
20 Nov 17, 10:00 AM
सलाहकार लेखएग्रोस्टार एग्रोनोमी सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस
नारंगी जंग:- रस्ट रोग
रबी मौसम में गेहूं एक महत्वपूर्ण फसल है। महाराष्ट्र में, सिंचित और असिंचित दोनों प्रकार के खेतों में गेहूं की खेती की जाती है। महाराष्ट्र में उत्पादकता देश की औसत से कम है। राज्य में इस कम उत्पादकता के कई कारण हैं। सुधारित किस्मों का उपयोग न करना, जल व्यवस्था की कमी, फसल संरक्षण की कमी आदि । गेहूं की फसल में, जंग ज्यादातर पाया जाने वाला सबसे आम रोग है। हम इस रोग के लक्षण, रोग के प्रकार और इसकी व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे।
जंग एक कवक जन्य रोग है। महाराष्ट्र में काली जंग और नारंगी जंग का संक्रमण पाया जाता है। काली जंग - यह रोग फसल के बालियों के चरण में पाया जाता है। काली जंग का प्रकोप तने, डंठल, बाली पर दिखाई देता है। जब पत्तियां पहले प्रभावित होती हैं, तो क्लोरोसिस होने के कारण पत्तों पर सफेद धारियां दिखाई देते है। उसके बाद अनुकूल वातावरण में, उस जगह पर लाल रंग के कवकी युरिड़ोस्पोर तैयार होते है और उसमे बहुत सारे युरिड़ो होते है। जैस फसल का विकास होता है और तापमान बढ़ता है, युरिड़ोस्पोर काले रंग के टेलीयूथोस्पोर में बदल जाते है। यदि तापमान 14 से 23 डिग्री सेल्सियस के बीच हो तो यह रोग तेजी से फैलता है। यदि फसल की प्रारंभिक अवस्था में रोग का प्रकोप हो जाए तो इससे फसल को भारी नुकसान पहुंचता है। आधे से अधिक मात्रा में उपज घट जाती है। नारंगी जंग- यह रोग गेहूं के पत्तियों और डंठलों पर दिखाई देता है। इस रोग के लक्षण पौधे अवस्था से लेकर परिपक्वता अवस्था तक देखे जाते हैं। रोग का प्रकोप होने के बाद, पत्तो की सतह पर छोटे धब्बे दिखाई देते हैं। कुछ अवधि के बाद, पत्तो और डंठलों पर नारंगी रंग के गोल घाव देखे जाते हैं । इन घावों को पहली बार पत्तियों की ऊपरी सतह पर देखा जाता है और कुछ अवधि के बाद, वे दोनों सतह पर दिखाई देते है। यह रोग ज्यादातर हवा के माध्यम से फैलता है। यदि हम संक्रमित पत्तियों को उंगली से स्पर्श करते हैं, तो नारंगी रंग का पाउडर उंगली पर चिपकता है। इस रोग के लिए 15 से 20 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल है। फ़सल व्यवस्था 1) रासायनिक उर्वरकों की संतुलित खुराक दी जानी चाहिए। यूरिया की सुझाई गई खुराक से अधिक न दें । 2) जंग प्रतिरोधी किस्म बुवाई के लिए चुनी जानी चाहिए। 3) समय पर बुआई की जानी चाहिए। फसल की जरूरत के हिसाब से पानी दिया जाना चाहिए। 4) जैसे ही जंग रोग के लक्षण दिखाई दें, मैंकोजेब 2.5 ग्रा/लीटर पानी का छिड़काव करना चाहिए।
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