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सलाहकार लेखउत्तर प्रदेश कृषि विभाग
जानें गेंहू 🌾 में सिंचाई देने का उचित समय व मात्रा!
👉🏻 प्रयाप्त सिंचाई साधन की दशा में सिंचाई की अवस्थाएं:- 1. सामान्यत: बौने गेहूँ 🌾 की अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए हल्की भूमि में सिंचाइयाँ निम्न अवस्थाओं में करनी चाहिए। इन अवस्थाओं पर जल की कमी का उपज पर भारी कुप्रभाव पड़ता है, परन्तु सिंचाई हल्की करें। पहली सिंचाई- क्राउन रूट-बुआई के 20-25 दिन बाद अर्थात ताजमूल अवस्था। दूसरी सिंचाई- बुआई के 40-45 दिन पर अर्थात कल्ले निकलते समय। तीसरी सिंचाई- बुआई के 60-65 दिन पर अर्थात दीर्घ सन्धि अथवा गांठे बनते समय। चौथी सिचाई- बुआई के 80-85 दिन पर अर्थात पुष्पावस्था। पाँचवी सिंचाई- बुआई के 100-105 दिन पर अर्थात दुग्धावस्था। छठी सिंचाई- बुआई के 115-120 दिन पर अर्थात दाना भरते समय। 2. दोमट या भारी दोमट भूमि में निम्न चार सिंचाइयाँ करके भी अच्छी उपज प्राप्त की जा सकती है परन्तु प्रत्येक सिंचाई कुछ गहरी (8 सेमी० ) करें। पहली सिंचाई- बोने के 20-25 दिन बाद। दूसरी सिंचाई- पहली के 30 दिन बाद। तीसरी सिंचाई- दूसरी के 30 दिन बाद। चौथी सिंचाई- तीसरी के 20-25 दिन बाद। सीमित सिंचाई साधन की दशा में सिंचाई की अवस्थाएं:- यदि तीन सिंचाइयों की सुविधा ही उपलब्ध हो तो ताजमूल अवस्था, बाली निकलने के पूर्व तथा दुग्धावस्था पर करें। यदि दो सिंचाइयाँ ही उपलब्ध हों तो ताजमूल तथा पुष्पावस्था पर करें। यदि एक ही सिंचाई उपलबध हो तो ताजमूल अवस्था पर करें।
स्रोत:- उत्तर प्रदेश कृषि विभाग, प्रिय किसान भाइयों दी गई जानकारी उपयोगी लगी, तो इसे लाइक 👍🏻 करें एवं अपने अन्य किसान मित्रों के साथ शेयर करें धन्यवाद!
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